rahim ke dohe in hindi

Rahim Ke Dohe in Hindi-रहीम के दोहे हिंदी अर्थ के साथ

Rahim ke dohe in hindi : मित्रों जीवन में कई बार उतार चढ़ाव आता है और इसी का नाम जिंदगी है अगर उतार चढाव ना हो तो जिंदगी का कोई मोल नहीं है। यानि की जीवन और उतार चढ़ाव दोनों ही एक दूसरे के पूरक होते है। ऐसे में बहुत सारे लोग इन उतार चढ़ाव को झेल लेते है और अपने संघर्ष भरे जीवन में भी शांत रहकर जीवन यापन करते है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है कभी कभी मनुष्य जीवन के उतार चढ़ाव में क्रोधित होकर अनाब शनाब बोल जाते है जों बाद में उसी को पछतावा देता है और उसका पश्चाताप चाहकर भी वो नहीं कर पाता है।

रहीम जों एक कवि थे किसी भी भारतीय या फिर हमारे पड़ोसी देशो के लोगो के पहचान के मोहताज नहीं है ये आजकर के सबसे विख्यात यानि की ख्याति प्राप्त कविओ में से एक है और इन्होने अपने संघर्ष भरे जीवन के बहुत सारी शिक्षाएं लेकर लोगो को उपदेश दिया करते है। इनके द्वारा दिए गए उपदेश ‘दोहे’ के रूप में युग युगानंतर से लोगो द्वारा पढ़े जाते है एवं अपने जीवन के सार को समझते है। रहीम के दोहे सभी मनुष्य को उपदेश देता है की अपने जीवन में क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए –

rahim ke dohe in hindi
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आज के अपने इस लेख में हम रहीम के कुछ दोहे (Rahim ke dohe in hindi class 7) & (rahim ke dohe in hindi class 5) जानेंगे साथ ही उनका हिंदी में क्या अर्थ होता है ये भी समझेंगे आईये बिना देरी किये जानते है रहीम के दोहे –

रहीम के दोहे : Rahim Ke Dohe in Hindi

यहाँ हम आपके लिए दोहे और उनके अर्थ को विस्तार पूर्वक बताने वाले है आईये बिना देरी किये जानते है –

रहीम के दोहे 1

  दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं.

      जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं.

अर्थ :-

देखने से कौवा और कोयल एक समान दिखता है एवं उनकी पहचान नहीं हो पाती है लेकिन वसंत ऋतू आते है कोयल की मधुर वाणी इसकी पहचान करा देती है ठीक वैसे ही मनुष्य की सुंदरता भी उनके बातो से होती है ना की शरीर से।

रहीम के दोहे 2

        रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेइ,

   जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ.

अर्थ :-

जिस प्रकार आंसू आँख से निकलकर मन के दुःख को व्यक्त करता है ठीक उसी प्रकार घर से निकाला हुआ आदमी भी अपने घर के भेद को व्यक्त कर देता है ।

रहीम के दोहे 3

       पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन.

       अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछे कौन.

अर्थ :-

वर्षा ऋतू में कोयल शांत हो जाता है क्योकि उस वक्त मेंढको का बोल बाला हो जाता है और कोयल को कोई नहीं पूछता लेकिन फिर भी कोयल की मधुर वाणी ख़राब नहीं होती, वैसे ही जीवन में कई ऐसे मौके आते है जिनमे जानकार व्यक्ति शांत हो जाता है और इससे उनका अपमान नहीं होता है।

रहीम के दोहे 4

       रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय.

        सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय.

अर्थ :-

रहीम कहते है अपने मन के दुःख को मन में ही छुपा देना चाहिए क्योकि सुनने वाला व्यक्ति आपके मन को शांतवना दे देगा लेकिन आपके दुःख का निवारण नहीं कर सकता है।

रहीम के दोहे 5

         वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग.

           बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग.

अर्थ :-

वैसे लोग धन्य है महान है जों लोगो पर उपकार करते है, जिस प्रकार मेहंदी बाटने वाले के हाथो में मेहंदी लगा जाती है उसी प्रकार उपकारी आदमी भी अपने उपकार से धन्य हो जाता है।

रहीम के दोहे 6

        बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय.

         रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय.

अर्थ :-

अगर बात बिगड़ गयी है तो लाखो कोशिश करने के बाद भी बातो को बनाया नहीं जा सकता, जिस प्रकार दूध फट जाने के बाद लाखो कोशिश से भी मक्खन नहीं बन सकता।

रहीम के दोहे 7

         रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय.

          टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय.

अर्थ :-

रहीम कहते है प्रेम का रिश्ता कभी नहीं तोड़ना चाहिए क्योकि धागा तोड़ने के बाद अगर जोड़ा जाये तो उसमे गांठ पड़ जाती है वैसे ही प्रेम के रिश्ते भी तोड़ने के बाद जोड़ने पर गांठ पड़ जाती है।

रहीम के दोहे 8

           जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग.

           चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.

अर्थ :-

अच्छा आदमी कितने भी बुरे लोगो के साथ रहे वो कभी बुरा नहीं होगा जिस प्रकार जहरीला सांप चन्दन के वृक्ष में सालो तक रहने के बावजूद भी वृक्ष को जलरीला नहीं कर पाता है।

रहीम के दोहे 9

              रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि.

              जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि.

अर्थ :-

रहीम कहते है बड़े वस्तु को देख छोटे वस्तु का निरादर नहीं करना चाहिए क्योकि जहाँ सुई की आवश्यकता होती है वहाँ बेचारी तलवार कुछ नहीं कर सकती है।

रहीम के दोहे 10

               रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार.

              रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार.

अर्थ :-

जिस प्रकार टूटे मोती के माले को बार बार में धागे में जोड़ा जाता है, मोतिओ को फेंका नहीं जाता उसी प्रकार अगर आपका प्रिय बार – बार भी रूठें तो भी उसे मना लेना चाहिए।

रहीम के दोहे 11

               खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौंन लगाय.

              रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय.

अर्थ :-

खीरा को काटने के बाद उसके कड़वेपन को दूर करने के लिए उसके सिरे पर नमक लगाया जाता है वैसे ही कटु वचन बोलने वालो के साथ किया जाना चाहिए।

रहीम के दोहे 12

             जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं.

          गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं.

अर्थ :-

बड़े को छोटा कहने से उसका बड्डप्पन कम नहीं होता जिस प्रकार गिरिधर (कृष्ण) को मुरलीधर कहने से उनकी महिमा  कम नहीं होती।

रहीम के दोहे 13

             लोहे की न लोहार की, रहिमन कही विचार जा

             हनि मारे सीस पै, ताही की तलवार

अर्थ :-

तलवार ना तो लोहे की होती है ना ही लोहार की तलवार, तलवार उस वीर मनुष्य की होती है जों उस तलवार से अपने शत्रु के सिर के चीथड़े उड़ा सके।

रहीम के दोहे 14

               रहिमन नीर पखान, बूड़े पै सीझै नहीं

               तैसे मूरख ज्ञान, बूझै पै सूझै नहीं

अर्थ :-

अगर पत्थर को नदी में फेंक दिया जाते तो पत्थर नर्म नहीं हो जाता वैसे ही मुर्ख को कितनी भी शिक्षा दे दी जाये वो मुर्ख ही रहता है।

रहीम के दोहे 15

              साधु सराहै साधुता, जाती जोखिता जान

               रहिमन सांचे सूर को बैरी कराइ बखान

अर्थ :-

साधु अपने साधुता की तारीफ करता है योगी अपने योग की लेकिन वीर पुरुष के वीरता का बखान उसके शत्रु भी करते है।

रहीम के दोहे 16

              वरू रहीम  कानन भल्यो वास करिय फल भोग

              बंधू मध्य धनहीन ह्वै, बसिबो उचित न योग

अर्थ :-

निर्धन होकर बंधु और बाँधवो के बीच रहना उचित नहीं होता है इससे अच्छा होता है वनो में जाकर रहना और फलो का सेवन करना।

रहीम के दोहे 17

              निज कर क्रिया रहीम कहि सीधी भावी के हाथ

              पांसे अपने हाथ में दांव न अपने हाथ

अर्थ :-

मनुष्य सिर्फ कर्म कर सकता है सिद्धि तो भाग्य में होती है जिस प्रकार चौपड़ खेलते वक्त पासा तो अपने हाथो में होता है लेकिन दांव क्या होगा ये नहीं कोई नहीं बता सकता।

रहीम के दोहे 18

                तासों ही कछु पाइए, कीजे जाकी आस

                 रीते सरवर पर गए, कैसे बुझे पियास

अर्थ :-

अगर किसी से कुछ मिल सकता है तो आशा उसी से रखनी चाहिए जैसे सूखे तालाब से प्यास बुझाने की आशा नहीं की जाती है।

रहीम के दोहे 19

              वृक्ष कबहूँ नहीं फल भखैं, नदी न संचै नीर

               परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर !

अर्थ :-

वृक्ष अपने फल को कभी नहीं खाता है और नदी कभी अपने जल को संचित नहीं करती है ये सदैव दूसरों के उपकार के लिए होते है वैसे ही अच्छे काम करने के लिए साधु भी अपना शरीर धारण करता है।

रहीम के दोहे 20

               समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात.

              सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात.

अर्थ :-

हमेशा समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए क्योकि वृक्ष समय आने पर ही फल धारण करता है और समयानुसार ही फल को झाड़ा देता है, इसीलिए दुःख के समय में पछताना बेकार होता है उपयुक्त समय आने पर दुःख कट जाता है।

निष्कर्ष :-

यहाँ आपको 20 Rahim ke dohe in hindi के बारे में बताया गया है इसके साथ ही अर्थ के साथ रहीम के दोहे बताये गए है इन दोहो से लोग अपने जीवन से परिचित होते है एवं शिक्षा प्राप्त करते है और उचित समय पर इन दोहो से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते है । आशा करते है हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी ऐसे ही और जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहिये।

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